सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के लिए ब्याज में छूट के साथ एक सूक्ष्म वित्त योजना।इकाई की लागत1,40,000/- रुपये तकसहायता की मात्रापरियोजना लागत का 90% तकप्रति वर्ष देय ब्याज दरएस.सी.ए. - 1 %लाभार्थी- 4 %महिला समृद्धि योजना के तहत संबंधित एस.सी.ए. के माध्यम से ऋण के पुनर्भुगतान पर पात्र लाभार्थी एन.एस.एफ.डी.सी.योजना के तहत किसी भी ऋण का लाभ उठा सकते हैं।

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काजू के कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है. इसकी खेती केरल, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तामिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में ठीक-ठाक स्तर पर की जाती है. हालांकि, अब इसकी खेती झारखंड और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी की जाने लगी है. काजू का पौधा गर्म तापमान पर अच्छी तरह से विकास करता है.

तरबूज की फसल के लिए दोमट काली मिट्टी ज्यादा पैदा देती है। खेत की तैयारी समतल जुताई करके, बीज शोधन और बीज की मात्रा 150 से 200 ग्राम प्रति एकड़ करेंगे तो फसल भी अच्छी होती है। किसान की माने तो एक एकड़ में 300 क्विंटल के लगभग तरबूज तैयार हो जाता है। जिसमें एक पीस का वजन तीन किलो से लेकर नौ किलो तक होता